वक़्त बदल गया है...
वक़्त बदल गया है, मुद्दे बदल गए है, मक़सद बदल गए है। जवानी के दौर में मैं अच्छी खासी जॉगिंग, स्प्रिंट और पुश-अप्स लगाता था। उद्देश्य एक ही था - ख़ूबसूरत लड़कियों को प्रभावित करना, पटाना। कुछ दिनों पहले मैंने कुछ जवान लड़कों और लड़कियों को जॉगिंग करते देखा। उन्होंने अपने मोबाइल फोनों को अपनी बांहों पर बांधा था। मेरे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने ऐप डाउनलोड किया है जो उनके कदमों का हिसाब किताब रखता है। दस हज़ार से ज़्यादा कदम चलने पर उन्हें चीज़ों पर भारी छूट मिलती है। जॉगिंग और डिस्काउंट अब दोनों साथ-साथ चलते है। अक़्सर मै एक बुज़ुर्ग दंपत्ति को पार्क में दोपहर में टहलते देखता हूँ। कल दोपहर को मैं किसी काम से पार्क से गुज़र रहा था, उसी बुज़ुर्ग दंपत्ति को बेंच पर बैठा देखा। "अंकल जी, मैं अक़्सर आपको दोपहर में टहलते हुए देखता हूँ। आज आप बैठे है। तबीयत तो ठीक है ना?" "हाँ बेटा, सब कुछ दुरुस्त है।" बुज़ुर्ग ने जवाब दिया "वैसे अंकल जी अब गर्मी हो गई है। टहलने के लिए सुबह का समय अच्छा होता है।" मैंने...