एक गुज़ारिश

 इस बात से ब-ख़ूबी है ख़बर 

मुश्किल है मेरी हर राहगुज़र 


उतर गया है दिल से दहर

क़फ़स बन गया ये शहर


एक गुज़ारिश है तुम से मगर 

हो जाओ मेरे हमसफर अगर 


दर्द-ओ-अलम मेरे जाऐंगे ठहर 

राहें रोशन होंगी हर पहर 


दहर : दुनिया

क़फ़स : क़ैद-ख़ाना

दर्द-ओ-अलम : दुख और तकलीफ़ें



~ संजय गार्गीश ~ 

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