वेलेंटाइन डे पर नौजवानों को संदेश
अपनी मोहब्बत का इज़हार करना आसान है।
पर मोहब्बत को बरक़रार रखना मुश्किल है, बेहद मुश्किल।
यही वज़ह है कि मौजूदा वक़्त में बड़ी तादाद में तलाक़ हो रहें है।
मै मोहब्बत के मामलों का माहिर तो नहीं हूँ पर अपने कुछ तजुर्बे वेलेंटाइन डे के मौके पर नौजवानों के साथ शेयर करना चाहता हूँ।
आमतौर पर "बेहद नज़दीकियाँ" ही मोहब्बत का मतलब समझा जाता है - एक दूसरे की क़ुर्बत में खो जाना।
लेकिन मेरा तजुर्बा कहता है कि ज़्यादा करीबियां घुटन का एहसास लाती हैं, नुक़सान-देह होती है।
मोहब्बत को पुख़्ता रखने के लिए कभी कभार दूरियाँ भी ज़रुरी है।
मोहब्बत का मतलब अपनी ख़्वाहिशों को एक दूसरे पर थोपना हरगिज़ नहीं है।
मोहब्बत का मतलब है एक दूसरे को उसकी ख़ूबियों और दोषों के साथ क़बूल करना।
मेरा मानना है कि मोहब्बत में इज़ाफ़ा "क़ैद" से नहीं, "आज़ादी" से ही मुमकिन है।
एक दूसरे को आज़ादी देने से ही मोहब्बत में मजबूती आती है।
सबसे अहम है इस बात का इल्म होना कि जिस्मानी प्यार आरज़ी होता है, क्षणिक होता है।
अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो उसकी रुह से किजिए, उसके जिस्म से नहीं।
खूबसूरती, दौलत, शौहरत, ओहदे - ये सब कुछ दिनों के ही मेहमान होते है। इन्हें मद्देनजर रख कर मोहब्बत करना मोहब्बत को नापाक करना है।
मोहब्बत किजिए तो दिल-ओ-जान से किजिए, बिना किसी उम्मीद के किजिए।
~ संजय गार्गीश ~
Comments
Post a Comment