चैन ढूंढते रहे हम उम्र भर

 




चैन ढूँढते रहे हम उम्र-भर

फ़रेब ही मिला हमे दर-ब-दर


देख कर आईना हुआ ये एहसास

अक्स भी है आज मुझसे बे-ख़बर 


ज़ख्म गहरे थे, नुमायाँ ना हो सके

दर्द सहने का भी आ गया है हुनर 


उम्र बीत गई यही सोच सोच कर 

क्या मिलेगी कभी सुकून की लहर 


चैन ढूँढते रहे हम उम्र-भर

फ़रेब ही मिला हमे दर-ब-दर... 


फ़रेब : धोखा  

दर-ब-दर : जगह जगह

अक्स : परछाईं  

नुमायाँ : ज़ाहिर 


~ संजय गार्गीश ~ 


 


Comments

Popular posts from this blog

Importance Of Meditation.

One only juggles between two different dreams.

The Importance Of Worship