बुढ़ापे में आर्थिक स्वतंत्रता ज़रूरी है
मेरे एक जानकार ने कई रोज़ पहले दर्दनाक किस्सा सुनाया।
दिल्ली में एक मकान से बदबू आ रही थी। पड़ोसियों ने पुलिस को इत्तिला दी। दरवाज़े को तोड़ा गया, पुलिस ने देखा कि उम्रदराज़ मकान मालिक का शव बिस्तर पर पड़ा था। मौत की वजह - हार्ट अटैक।
पड़ोसियों ने बताया कि कई मर्तबा वे ही बुज़ुर्ग को खाना, दवाइयाँ खरीद कर देते थे।
अलमारी खोलने पर एक डायरी मिली जिसमें उसके बेटे और बेटी का फोन नंबर था।
बेटा अमेरिका में बहुत बड़ा डाक्टर है। फोन करने पर उसने कहा, "इस लाश के लिए मैं क्या सारे काम छोड़कर आऊं। आप ने जो इस का करना है कर दिजिए।"
मुंबई में रह रही बेटी का जवाब था, "मैं शादीशुदा हूँ, दो बच्चे हैं। अपने हस्बैंड, बच्चों को देखना पड़ता है। सॉरी, मैं वक़्त नहीं निकाल सकती।"
क्या आप जानते हैं कि भारतीयों में सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी क्या है?
एक आम भारतीय अपने बच्चों की बेहतरीन परवरिश, तालीम, शादी पर बेइंतहा खर्च करता है। सोचता है कि ये सब लान्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है, मुनासिब रिटर्न उसे बुढ़ापे में मिलेगा जब वह कमाने योग्य नहीं होगा।
बस यही सोच सबसे बड़ी भ्रांति है।
आज से ४०-५० साल पहले शायद ऐसी उम्मीद या सोच रखना वाज़िब था।
पर मौजूदा दौर में ऐसी ख़ुशफ़हमी पालना भारी मुसीबत को दावत देना है।
कारण दो हैं :
(क) : आज के ज़माने में अधिकतर नौजवानों को सिर्फ अपने आप से ही मतलब है, खुदगर्ज़ हैं।
(ख) : कुछ, तादाद बहुत कम है, अपने माँ बाप की वाकई सेवा करना चाहते हैं पर मुमकिन नहीं हो पाता। उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां, महंगाई आड़े आ जाती है।
कल मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा, "शर्मा जी, मेरा बेटा कबीर अमेरिका में मास्टर्स डिग्री के लिए जाना चाहता है। क्या मैं अपनी पुश्तैनी ज़मीन बेच दूँ। आखिर जब वह डॉलर कमाएगा तो मुझे भी तो कुछ देगा, मेरी भी तो देखभाल करेगा।"
"दोस्त, पुश्तैनी ज़मीन बेचने से बेहतर है बेटे को एजुकेशन लोन दिलवा दो। अगर बेटा क़ाबिल होगा तो अच्छी नौकरी हासिल कर के लोन चुकता कर देगा।" मैंने सलाह दी
"पर शर्मा जी अगर कबीर लोन ना चुका पाया तो?"
"तो यक़ीनन वह आपके बुढ़ापे में आपकी मदद करने में भी नाक़बिल होगा।"
समझदार माँ बाप वही हैं जो अपने बच्चों के सपनों को मुकम्मल करने से पहले अपनी आर्थिक स्वतंत्रता पर तव्वजो देते हैं।
याद रहे, आर्थिक निर्भरता आत्म-सम्मान को खत्म कर देती है।
बुढ़ापे में इज़्ज़त तभी मिलती है जब आप अपना चेक खुद लिख सकें।
~ संजय गार्गीश ~
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