इंसानी जिस्म का महत्व
"हालांकि इंसानी जिस्म दुनिया की सबसे गंदी और बेकार चीज़ है फिर भी हमारे शास्त्र इसी की तारीफ करते है।
इंसान और ज़्यादातर प्राणियों के जिस्म में दाख़िल होने के नौ रास्ते है जिन्हें 'नवद्वार' भी कहा जाता है - दो आँखें, दो कान, दो नथुने, मुँह, गुदा और जननांग। इन सभी नौ छिद्रों से केवल गंदे तरल पदार्थ ही बाहर निकलते है।
असल में यह शरीर मल और मूत्र से भरी एक थैली के अलावा और कुछ नहीं है।"
"लेकिन सर, आप यह कैसे कह सकते हैं कि मानव शरीर सबसे बेकार चीज़ है।" एक दाढ़ी वाले अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने पूछा
"सर, मानव शरीर सबसे बेकार चीज़ इसलिए है क्योंकि मरने के बाद भी दूसरे जानवरों के शरीरों से पैसे कमाए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे चमड़े के कपड़े, जूते और वाद्य यंत्र बनाने में।
लेकिन मानव शरीर ही अकेला ऐसा शरीर है जो मरने के बाद पूरी तरह से बेकार हो जाता है। और तो और, इसके दाह संस्कार या दफनाने पर पैसे भी खर्च करने पड़ते है।" मैंने जवाब दिया
"लेकिन सर, इन सबके बावजूद हमारे शास्त्रों में इसे बेशकीमती क्यों बताया गया है।"
"ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ़ इंसानों के पास ही विवेक होता है - सही और गलत के बीच फ़र्क करने की शक्ति। सिर्फ़ इंसानों में ही ज्ञान हासिल करने की क्षमता होती है। लेकिन दुख की बात है कि आजकल विवेक का इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है। ज़्यादातर लोग न सिर्फ़ बेशर्मी से गलत काम कर रहे है बल्कि दूसरों की बिना सोचे समझे नकल भी करते है।"
"वो कैसे सर?"
"ज़रा देखिए, रैलियों या धरनों में लगभग पचानवे प्रतिशत लोग मुद्दों के बारे में बिल्कुल अनजान होते है। लेकिन वे बस दूसरों की नकल कर के धरनों में बैठ जाते है और कुछ चालाक लोगों के हाथों की कठपुतली बन जाते हैं। अमूमन लोग लकीर के फकीर होते है, विवेक का इस्तेमाल ना के बराबर होता है।
सिर्फ़ 'विवेक' के ज़रिए ही इंसान समझ सकता है कि :
(क) इस दुनिया में कोई भी खुशी हमेशा रहने वाली नहीं है।
(ख) दुनिया की सारी खुशियाँ आखिरकार दुखों में ही तब्दील होती है।
दुनियावी खुशी चंद लम्हों के लिए ही होती है। इसलिए इंसान को ऐसी खुशी पाने की कोशिश करनी चाहिए जो कभी खत्म ना हो, पैसे या नशीले पदार्थों जैसी दूसरी चीज़ों पर निर्भर भी न हो।" मैंने कहा
"सर, अगर कोई अपने विवेक का इस्तेमाल न करे तो क्या होगा?"
"तो वह फिर से मौका गँवा देगा। तो उस में और बंदर जैसे किसी निचले दर्जे के जीव के बीच कोई फ़र्क नहीं रह जाएगा।" मैंने जवाब दिया
~ संजय गार्गीश ~
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