प्राथना और पूजा में फ़र्क़

 "अंग्रेज़ी ज़बान में इबादत के लिए एक ही लफ्ज़ है - प्रेयर करना। 

पर हिंदूस्तानी बोली में इबादत के लिए मुख़्तलिफ़ लफ्ज़ है। आमतौर पर प्राथना, पूजा का इस्तेमाल किया जाता है।" 

"सर, क्या प्राथना और पूजा में कुछ फ़र्क़ है?" एक साधिका ने मुझ से कुछ दिनों पहले पूछा 

"प्राथना मक़सद के लिए की जाती है। परमात्मा से नौकरी के लिए, बच्चों की सलामती के लिए, धन-दौलत इत्यादि के लिए गुहार लगाना ही प्राथना है। 

लेकिन पूजा का मुख्य उद्देश्य होता है शुक्रिया करना, परम पिता को थैंक्स करना कि जो कुछ भी उन्होंने दिया है, वह लाखों करोड़ों लोगों की पहुॅंच से बहुत बाहर है।" मैंने जवाब दिया 

"तो सर हमें प्राथना करनी चाहिए या पूजा?" 

"बेशक पूजा।" 

"पर क्यों? हम अपने पिता से मांग सकते है तो परम पिता से मांगने में क्या हर्ज है?" 

"आप के पिता इंसान है, आप की दिली ख़्वाहिशें नही जान सकते, ज़ाहिर करनी पड़ती है। उन्हें यह भी इल्म नही है कि आप की ख़्वाहिश पूरी करना सही है या नहीं। यह भी मुमकिन है कि आप की जायज़ ख़्वाहिशें पूरी करना उन के बस में ना हो।

अगर आपको लगता है कि सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान परम पिता को भी अपनी ख़्वाहिशों से रुबरु करवाने की ज़रूरत है तो क्या आप समझते हो कि उनमें इतनी क़ाबलियत होगी कि वे आप की जायज़ ख़्वाहिशों को पूरा कर सके?" मैंने मुस्कुरा कर साधिका से पूछा 

~ संजय गार्गीश ~ 




Comments

Popular posts from this blog

Leave Your Body Before It Leaves You.

तूफ़ान-ए-हवादिस

"Emptiness" Is More Valuable Than "Fullness".